रजिस्टर्ड यूजर        
| न्यू यूजर   रजिस्टर  | चुने सही इंस्टिट्यूट   क्लिक करे  

प्रतिभा तो सभी मे होती है लकिन कामयाबी के लिये जुनून जरुरी है

Updated on: Nov, 11 2013 13:31 PM

 

समय-समय पर सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार ऐसे छात्रों के प्रेरक किस्से बताते रहे हैं जिन्होंने संघर्षों से पार पाकर आईआईटी में प्रवेश हासिल किया। इस बार पढि़ए एक ऐसे छात्र की कहानी जो अगर गरीबी से हार जाता तो शायद किसी फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा होता।

लेकिन उसने मुश्किलों को मात दी और आज भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में साइंटिस्ट अभिमन्यु की कहानी है। बिहार के मधुबनी जिले के एक छोटे गांव बलवा से वह पटना आया था। दसवीं पास कर ली थी। एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला भी मिल गया था। उसका सपना था कि वह आईआईटी में जाए। कहीं से पता मालूम करके एक शाम वह मेरे पास आया। मैं थका-हारा लौटा था। सोचा चाय पर उससे बात करूंगा।

 

 

वह ठीक समय पर आया। मगर जैसे ही चाय सामने आई वह भावुक हो गया। आंखों से आंसू बहने लगे। मैं समझ नहीं पाया कि क्या हुआ है? चाय के प्याले ने उसके भीतर जैसे तूफान सा ला दिया था। इसकी वाजिब वजह भी थी। उसे अपने पिता याद आ गए थे, जो उसकी पढ़ाई के लिए गांव से पटना आ गए थे। रेलवे स्टेशन के पास रात भर चाय का ठेला लगाकर जो कुछ कमाते, वही आमदनी एक कमरे के घर में रह रहे परिवार के भरणपोषण का जरिया थी।

 

कड़ाके की सर्दी, तेज बारिश या गर्मी। मौसम कोई भी हो। वे हमेशा ठेले पर दिखाई देते। कभी हफ्ता देने से चूक जाएं तो पुलिसवालों की ज्यादती भी सहनी पड़ती। अभिमन्यु सब अपनी आंखों से देख रहा था। मगर वह जो कुछ कर सकता था, उसके लिए समय और सब्र दोनों ही चाहिए थे।


 

मैंने देखा कि उसमें प्रतिभा जितनी है, उससे ज्यादा जुनून है। वह एकदम फिट था। वह सुपर 30 में शामिल हुआ। हर दिन 15-17 घंटे पढ़ाई का सिलसिला शुरू हुआ। वह ज्यादातर पढ़ाई रात में करता था। अक्सर पूरी रात जागकर। मैंने इसकी वजह पूछी। बोला, मेरे पिता जब मुश्किल हालात में रात भर खड़े रहकर चाय बेचते हैं तो मुझे घर में आराम से नींद कैसे आ सकती है? रात भर पढ़ क्यों नहीं सकता? वर्ष 2008 में पहला प्रयास नाकाम रहा।

 

कुछ जल्दबाज शुभचिंतकों ने उसे कहीं काम करने की सलाह दी और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में गार्ड या किसी फैक्ट्री में लेबर के विकल्प भी सुझाए। यह एक कठिन मोड़ था पर उसका विश्वास अटल था। नतीजों से दिल दुखा मगर टूटा नहीं। तैयारी जारी रखी। अगले साल अच्छी रैंकिंग के साथ आईआईटी में चुन लिया गया। एक दिन उसने हिमाचल प्रदेश स्थित मंडी आईआईटी के कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट में कदम रखा। इसके बाद जब वह गांव गया तो नजरें बदली हुई थीं। लोगों के लिए तो जैसे वह इंजीनियर ही बन चुका था। उसकी सफलता ने एक काम जरूर किया।

 

 गांव में लोगों का पढ़ाई के प्रति नजरिया बदल गया। उन्हें समझ में आ गया कि सिर्फ शिक्षा ही जीवन को श्रेष्ठ बना सकती है। वह सबके सम्मान का हकदार बना। पिता की मेहनत और उसकी लगन सेक एक बड़ी मंजिल हासिल की थी। अभिमन्यु की ओर से ताजा सूचना यह है कि आईआईटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में वैज्ञानिक के पद पर नियुक्ति मिल गई है।

 

वह चाहता है कि सिर्फ नौकरी न करे बल्कि उसके हाथों कुछ नया भी हो। मुझे मालूम है उसका विश्वास अटल है। वह जरूर कुछ नया करेगा। वह जब भी पटना आता है और कभी हम चाय पर साथ होते हैं तो वह पहली चाय का वाकया हम दोनों को ही याद आ जाता है। अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर आ चुका है।

 

 

0View Comments
अपने विचार भेजने के लिए पहली बार हो, या इस मुद्दे पर हमारे संदेश बोर्ड पर रहते बहस नहीं

प्रतिक्रिया दें



यहाँ अपनी टिप्पणी पोस्ट करें