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शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित कीजिए

Updated on: Oct, 22 2013 13:42 PM

देश में बढ़ते शिक्षा उद्योग में गुणवत्ता सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है। यह बात एक नए अध्ययन में कही गई।गैर-व्यावसायिक शोध संगठन आरएएनडी द्वारा कराए गए अध्ययन में यह भी कहा गया कि देश को एक छात्र वित्तीय सहायता प्रणाली का विकास करना चाहिए तथा उसे लागू करना चाहिए और अर्हता को धीरे-धीरे एक्रीडिटेशन और गुणवत्ता से जोड़ना चाहिए।

अध्ययन में कहा गया, "नीतिनिर्माताओं को लगातार एक्रीडिटेशन प्रणाली का विकास और कार्यान्वयन करना चाहिए और उसे समय के साथ गुणवत्ता का प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए।" अध्ययन में कहा गया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल में ही अपने द्वारा नियमित संस्थानों में एक्रीडिटेशन को अनिवार्य किया है। आरएएनडी के वरिष्ठ नीति शोधार्थी और रिपोर्ट के सह-लेखक रफीक दोसानी ने कहा, "देश की उच्च शिक्षा संक्रमणकाल से गुजर रही है।" उन्होंने कहा कि यदि फंडिंग को गुणवत्ता से जोड़ दिया जाए, तो देश के नए स्वायत्त संस्थानों को एक दिशा मिलेगी, क्योंकि वे अपने गुणवत्ता सुधारने की कोशिश करेंगे। उल्लेखनीय है कि देश में उच्च शिक्षा में दाखिले में तेजी से वृद्धि हो रही है। देश की उच्च शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी व्यवस्था में से एक है, जिसमें 46 हजार से अधिक संस्थानों में 2.2 करोड़ छात्र दाखिल हैं।
 

 

आईआईटी दिल्ली के छात्र रीवेंट सोनी ने बताया कि दो दिनों तक आईआईटी में पहले छात्रों को यह बताया गया कि बोतल से किस तरह प्रोटोटाइप बल्ब बनाकर झुग्गी बस्ती में रोशनी करनी है। इस प्रोजेक्ट को हमने 'लाइटर लाइट प्रोजेक्ट नाम दिया। वर्कशॉप के बाद 130 छात्रों में से 25 के हाथ में प्रोटोटाइप बल्ब रूपी बोतलें थीं, जिन्हें घरों की छतों में फिट करना बाकी था। इसमें अहम भूमिका निभाई मुंबई से आने वाले प्रदीप और रंजीत ने जो माई शेल्टर फाउंडेशन इंडिया संस्था चलाते हैं। इन्होंने ही यह 50 से 55 वाट का बल्ब हमें बनाना सिखाया।

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