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सभी स्कूलों मे सहशिक्षा जरूरी हो

Updated on: Oct, 14 2013 18:47 PM

नई दिल्ली। संसद की स्थाई समिति ने महिला सशक्तिकरण पर देशभर के सभी स्कूलों में लडकियों के लिए लडकों के साथ सहशिक्षा की वकालत की है और कहा है कि इसके जरिए ही समाज मे स्त्री और पुरूषो के बीच लैंगिक समानता की भावना विकसित हो पाएगी। राजकुमारी रत्ना सिंह की अध्यक्षतावाली इस समिति ने लडकियो की शिक्षा पर गुरूवार को संसद मे पेश अपनी रिपोर्ट मे यह सिफारिश की है।

समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि देश के सभी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर ही सहशिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि लडके एवं लडकियो के बीच सौहार्दपूर्ण एवं एक-दूसरे की देखभाल करने की भावना विकसित हो। समिति ने कहा है कि स्कूलो मे ऎसे पाठ्यक्रम भी तैयार किए जाने चाहिए कि जिसमे लैगिंक भेदभाव न हो और लडके-लडकियों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दे। रिपोर्ट में कहा गया है कि समाज मे लडकियों के प्रति भेदभाव के कारण ही सामाजिक तथा आर्थिक रूकावटे उनके रास्ते में उत्पन्न हो रही है।

समिति ने कहा है कि लडकियों के प्रति लैंगिक असंवेदनशीलता के कारण ही समाज मे उनके प्रति शारीरिक एवं मानसिक हिंसा तथा उत्पीडन बढ रहा है। समिति ने कहा है कि लडकियों को जन्म से ही इस भेदभाव का शिकार होना पडता है जिसके कारण वे पोषण, शिक्षा तथा देखभाल से वंचित होती है।

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